यज्ञ-चालीसा
[आकार-२०x३०, पृष्ठ-१६, मूल्य- १० रूपये]


‘यज्ञ करना सर्वश्रेष्ठ कर्म है।’ धर्मशास्त्रों के इस कथन को सिद्ध करने के लिए ही प्रतिदिन यज्ञ करने वाले आचार्य श्री डॉ० वेदप्रकाश आर्य ने ‘यज्ञ-चालीसा’ पुस्तक की रचना की है। अपने इस अनुपम की रचना में - यज्ञ का अर्थ, यज्ञ के प्रकार तथा यज्ञ की महत्ता को दोहा और चैपाई-छन्दों मे बहुत सरल रूप में लिखा है। ‘यज्ञ-चालीसा’ को पढ़ने और सुननेवाले मनुष्य प्रतिदिन यज्ञ करने लगते है तथा यज्ञों से अपने-अपने परिवार तथा संसार को सुखी बनाते जाते हैं।